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(40) SUGANDHA SHAKTI PEETHA

(40) सुगंधा शक्तिपीठ (बांग्लादेश) सुगंधा शक्तिपीठ में देवी सुनंदा का मंदिर उत्तर बेरीशैल के गांव शिकारपुर में है । यह स्थान नदी सुनंदा के तट पर स्थित गांव शामरेल के अधीन है ।  मार्च के महीने में 14वीं चांद धार्मिक अवसर पर शिव चतुर्दशी को होता है । इस जगह माता सती की नाक गिरी थी । मंदिर के पूरे परिसर में उत्कीर्ण देवताओं के चित्र और मूर्तियों के साथ पत्थर से बना है ।  सुगंधा मंदिर बहुत पुराने समय में निर्माण किया गया था । एक प्रसिद्ध त्यौहार शिव चतुर्दशी  उत्साह और भक्ति भावना से मनाया जाता है

HOW TO PRESENT THE FLOWERS TO GOD

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(39) Maa Narayani Suchendrum Shakti Peeth

(39) माँ नारायणी  शुचीन्द्रम शक्तिपीठ -कन्याकुमारी   शुचीन्द्रम शक्तिपीठ यहां पर माँ सती के ऊपरी दांत गिरे थे और मूर्तियों में नारायणी के रूप में देवी मंा और शन्गहार /समहारा के रूप में भगवान शिव विराजमान हैं । शुचीन्द्रम मदिंर तमिलनाडू राज्य के कन्याकुमारी शहर मंे स्थित है । माता के इस शक्तिपीठ में पूजा-उपासना का एक अलग महतव है ।  आस्थावान भक्तों के अनुसार यहां उपासना करने से वैदिक और अन्य मंत्र सिद्ध होते हैं । नवरात्र, चैत्र पूर्णिमा, आषाढ़ और आषाढ़ एवं आश्विन आमवस्या, शिवरात्रि आदि विशेष अवसरों पर यहा विशेष उत्सप होते हैं । जिसमें देवी मां का हीरों से श्रृंगार किया जाता है ।  कन्याकुमारी में स्नान करने से भक्तों के सारे पाप मिट जाते हैं और वे पवित्र हो जाते हैं ।

Navam Guru Teg Bhadurji Ka Shaheedi Diwas

नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस     सिखों के नवम गुरु श्री तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों के धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए   अपने प्राणों का उत्सर्ग कर दिया, परंतु सत्य के मार्ग को नहीं छोड़ा। आत्मबलिदानी नौवें गुरु ने कश्मीरी पंडितों के आग्रह पर उनके 'तिलक' और 'जनेऊ' की रक्षा के लिए आत्माहुति दी, जो उनके अपने मत में निषिद्ध थे।  किसी दूसरे के धार्मिक अधिकारों  की रक्षा के लिए दिए जाने वाले बलिदान देने की यह एकमात्र मिसाल है। बैसाख कृष्ण पक्ष पंचमी संवत 1678 वि. यानी 18 अप्रैल, 1621 ई. को अमृतसर नगर में पिता छठे गुरु श्री हरगोविंद साहिब एवं माता नानकी के घर जन्म लेने वाले गुरु तेग बहादुर बचपन से ही आध्यात्मिक रुचि वाले थे। उन्होंने 1634 ई. में मात्र 13 वर्ष की आयु में करतारपुर के युद्ध में ऐसी वीरता दिखाई कि पिता ने उनका नाम 'त्याग मल' से 'तेग बहादुर' रख दिया। गुरु पिता के ज्योति जोत समाने के बाद वे पत्नी माता गुजरी के साथ अमृतसर के बकाला गांव में आकर साधना में लीन हो गए।  21 वर्ष की सतत् साधना के उपरांत 16...

(38) SHRISHALAM SHAKTI PEETH

(38) श्रीशैलम शक्ति पीठ श्रीशैलम शक्ति पीठ आंध्रप्रदेश के जोइनपुर में स्थित है । मां सती की मूर्ति ‘‘ महालक्ष्मी’’ के रूप में कहा जाता है और भगवान शिव सामबारानन्द या मालिकाअर्जुन स्वामी के रूप में पूजा जाता है । यहां महालक्ष्मी का अर्थ धन की देवी है । मां सती की गर्दन का हिस्सा यहाँ गिर गया इस  जगह आंध्र प्रदेश में स्थित है और एक बहुत प्रसिद्ध तीर्थ स्थल  है । देवी की मूर्ति सामबारानन्द भैरव के रूप में महा लक्ष्मी का रूप और शिव में है ।  भगवान शिव भी मालिकाअर्जुन स्वामी के रूप में कहा जाता है और मां ब्रहमरामबिका के रूप में जाना जाता है । यह एक बहुत ही प्रसिद्ध दिव्य पर्यटन स्थल है और भारत भर में भगवान शिव को समर्तित केवल 12 ज्योर्तिलिंग मंदिरों में से एक हैं । श्रीशैलम नालामलई के घने जंगलों में स्थित है जो कृष्णा नदी के दक्षिणी तट पर स्थित है , ब्रहमरा का अर्थ है मधुमक्खी और देवी ब्रहमराम्बीका (पार्वती), भगवान मल्लिकार्जुन (शिव) की पत्नी है ।  वह एक मधुमक्खी का रूप ले लिया और उसे पूजा की है कहा जाता है । द...

(37) SHRI PARVAT SHAKTI PEETH - LADAKH

(37) श्री पर्वत शक्तिपीठ - लददाख श्री पर्वत शक्तिपीठ में देवी सती के दाहिने पैर की पायल गिर गई थी । यहां श्री सुंदरी और सुंदरानन्द के रूप में भगवान शिव की पूजा की जाती है यह जगह लद्दाख (कश्मीर ) में स्थित है । किसी भी रूप में देवी माँ प्रकृति का प्रतिनिधित्व है ।  माँ श्री सुन्दरी हमारे चारों तरफ है जो माँ प्रकृति की सुंदरता का प्रतिनिधित्व करते हैं । इस शक्तिपीठ को लेकर विद्वानों में मतान्तर है कुछ विद्वानों का मानना है कि इस पीठ का मूल स्ािल लददाख है जबकि कुछ का मानना है कि यह असम के सिलहट में है जहां माता सती का दक्षिण तल्प यानि कनपटी गिरी थी ।  यहां की शक्ति श्री सुंदरी एंव भैरव सुन्दरानन्द हैं । एक शक्तिपीठ श्रीशैलम में स्थित है कि एक और विश्वास है, आंध्र प्रदेश भी है माँ खीरभवानी के केशीरभवानी पवित्र मंदिर भी यहां स्थित है ।  .   

(36) SHIVANI SHAKTI PEETH

(36) शिवानी शक्तिपीठ शिवानी शक्तिपीठ - चित्रकूट जो कि नदी मंदाकिनी के तट पर, दक्षिण चित्रकूट के 2 कि.मी. स्थित नाम जानकी सरोवर/ जानकी कुंड से एक पवित्र तालाब , एक शक्तिपीठ के रूप में माना जाता है । कुछ लोगों को शक्तिपीठ के रूप में स्थानीय ललिता देवी मंदिर कहते हैं ।  कुछ लोग आधुनिक राजगीर एक प्रसिद्ध बौद्ध तीर्थ के रूप में कहते हैं । राजगीर की गिद्ध पीक शक्तिपीठ के रूप में माना जाता है । राजगीर कई गर्म पानी कुंड स्प्रिंग्स हैं । और भक्तों का उन कुंडों में स्नान करना पवित्र माना जाता है । मां शिवानी: सती के दाहिने स्तन यहां गिर गया था ।  मां को शिवानी और भगवान शिव को चंदा के रूप में कहा जाता है । चित्रकूट क्षेत्र के शारदा मंदिर शक्तिपीठ के रूप में माना जाता है । लोग बुरी आत्माओं से छुटकारा पाने के क्रम में इस महत्वपूर्ण शक्तिपीठ पर आते हैं ।